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मालदीव: हारकर भी सत्ता नहीं छोड़ना चाहते अब्दुल्ला यामीन

मालदीव के निवर्तमान राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन चीन के करीबी माने जाते हैं, ऐसे में वहां सत्ता परिवर्तन भारत के दृष्टिकोण से काफी अहम माना जा रहा है. इसकी वजह ये भी है कि नवनिर्वाचित राष्ट्रपति इब्राहिम मोहम्मद सोलिह भारत के नजदीक माने जाते हैं.

मालदीव: हारकर भी सत्ता नहीं छोड़ना चाहते अब्दुल्ला यामीन मालदीव के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति इब्राहिम सोलिह

मालदीव में सियासी संकट गरमाने के बीच प्रमुख विपक्षी नेता अहमद नसीम ने अंतराराष्ट्रीय मदद का आह्वान किया है. मालदीव के पूर्व विदेश मंत्री अहमद नसीम ने अपने देश में सत्ता के शांतिपूर्ण हस्तांतरण के लिए अंतरराष्ट्रीय समर्थन मांगा है. यह मांग ऐसे समय में की गई है जब निवर्तमान राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन चुनाव में करारी शिकस्त के बाद भी सत्ता में बने रहने की पूरी कोशिश कर रहे हैं.

सोमवार को संयुक्त विपक्ष के उम्मीदवार और भारत समर्थक माने जाने वाले इब्राहिम मोहम्मद सोलिह ने चीन के वफादार और मौजूदा राष्ट्रपति यामीन को राष्ट्रपति चुनाव में अप्रत्याशित तरीके से हरा दिया था. यामीन ने अपने पांच साल के कार्यकाल के दौरान अपने लगभग सभी प्रमुख प्रतिद्वंद्वियों को या तो सलाखों के पीछे डाल दिया और निर्वासित होने के लिए मजबूर कर दिया.

अमेरिका में मौजूद नसीम ने न्यूज एजेंसी पीटीआई को बताया, ‘हमें एक स्वतंत्र और लोकतांत्रिक मालदीव के लिए मार्ग प्रशस्त करने की जरूरत है जो हिंद महासागर क्षेत्र की स्थिरता भी सुनिश्चित करेगा. यामीन चुनावों को निष्प्रभावी और बेमतलब बनाने की कोशिश कर रहे हैं. यह जरूरी है कि जनादेश का सम्मान हो और क्षेत्र एवं स्वतंत्र विश्व के नेता उन पर मालदीव में लोकतंत्र कायम करने का दबाव बनाएं.’

उन्होंने कहा, ‘ऐसे नाजुक मौके पर हमें अपने अंतरराष्ट्रीय साझेदारों से हर संभव समर्थन की जरूरत है.’ बुधवार को विपक्ष ने यामीन पर हाई प्रोफाइल राजनीतिक कैदियों को रिहा करने में देरी करने का आरोप लगाया था.

बता दें कि मालदीव में 23 सितंबर को हुए चुनाव हुए थे, जिसमें विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी के 56 वर्षीय उम्मीदवार इब्राहिम सोलिह ने जीत दर्ज की. उन्होंने निवर्तमान राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन को शिकस्त दी. इब्राहिम सोलिह को 17 नवंबर को शपथ दिलाई जाएगी.

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