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अनिल अंबानी को टैक्स छूट पर फ्रांस और भारत की सफाई

फ्रांस ने राफेल डील पर शनिवार को सफाई देते हुए कहा कि वहां के टैक्स विभाग और रिलायंस की कंपनी के बीच कर छूट को लेकर वैश्विक सहमति बनी थी और इसमें किसी भी तरह का राजनीतिक हस्तक्षेप नहीं किया गया है.

राफेल डील पर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा. भारत में सुप्रीम कोर्ट इस डील को लेकर फिर से केस की सुनवाई शुरू करने जा रहा है तो वहीं फ्रांस के स्थानीय मीडिया में खबर आई कि फ्रांस के अधिकारियों ने अनिल अंबानी की मदद कर्ज चुकाने में की थी. हालांकि इस रिपोर्ट्स से फ्रांस और भारत दोनों ने ही इनकार किया है. भारत ने इसे पक्षपातपूर्ण खबर करार दिया है.

फ्रांस ने शनिवार को सफाई देते हुए कहा कि वहां के कर विभाग और रिलायंस की सहयोगी कंपनी के बीच कर छूट को लेकर वैश्विक सहमति बनी थी और इसमें किसी भी तरह का राजनीतिक हस्तक्षेप नहीं किया गया है. फ्रांस की ओर से यह सफाई मीडिया में उन खबरों के आने के बाद दी गई है जिनमें अनिल अंबानी की फ्रांसीसी कंपनी को भारी-भरकम कर छूट मिलने की बातें कही गई हैं.

राजनीतिक हस्तक्षेप नहीं

फ्रांस के चर्चित अखबार ला मोंदे ने 36 राफेल विमानों की खरीद की भारत की घोषणा के बाद अनिल अंबानी की अगुवाई वाली रिलायंस कम्युनिकेशन्स की एक सहयोगी कंपनी का 14.37 करोड़ यूरो का कर 2015 में माफ किए जाने की खबर प्रकाशित की है.

फ्रांस के दूतावास ने जारी अपने बयान में कहा, ‘फ्रांस के कर प्राधिकरणों और दूरसंचार कंपनी रिलायंस फ्लैग के बीच 2008 से 2018 तक के कर विवाद मामले में वैश्विक सहमति बनी थी. विवाद का समाधान कर प्रशासन की आम प्रक्रिया के तहत विधायी और नियमों का पूरी तरह पालन करते हुए निकाला गया था.’ फ्रेंच दूतावास की ओर से कहा गया कि विवाद का समाधान करने में किसी भी तरह का राजनीतिक हस्तक्षेप नहीं किया गया.

पक्षपातपूर्ण खबर

दूसरी ओर, भारतीय रक्षा मंत्रालय ने फ्रेंच मीडिया में आई खबरों को नकारते हुए इसे अनुमान पर आधारित रिपोर्ट करार दिया. रक्षा मंत्रालय ने राफेल डील और टैक्स मसले को एक साथ जोड़कर देखने संबंधी रिपोर्ट पर कहा कि हमने एक प्राइवेट कंपनी को टैक्स में मिले छूट और भारत सरकार की ओर से राफेल सौदे के बीच संबंधों को जोड़ने वालीं खबरें देखी है. टैक्स में छूट देने की अवधि और छूट की विषयवस्तु का वर्तमान सरकार द्वारा किए गए राफेल डील से कोई संबंध नहीं है. टैक्स से जुड़े मसले और राफेल मामले को एक साथ जोड़कर देखना पूरी तरह गलत और पक्षपातपूर्ण है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 10 अप्रैल, 2015 को पेरिस में फ्रांस के तत्कालीन राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद के साथ 36 राफेल विमानों की खरीद का ऐलान किया था. हालांकि इस सौदे के बाद कांग्रेस लगातार केंद्र की मोही सरकार पर भ्रष्टाचार करने का आरोप लगाती रही है. कांग्रेस का आरोप है कि मोदी सरकार 1,670 करोड़ रुपये की दर से एक विमान खरीद रही है जबकि तत्कालीन यूपीए सरकार ने प्रति विमान 526 करोड़ की दर से सौदा पक्का किया था.

कांग्रेस और पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी अनिल अंबानी की अगुवाई वाली रिलायंस डिफेंस को दसॉ एवियशन का ऑफसेट साझीदार बनाने को लेकर भी केंद्र सरकार को निशाना बना रही है. आरोपों के इतर सरकार ने इन आरोपों को खारिज करती रही है.

समाचार पत्र ने कहा कि फ्रांस के अधिकारियों ने रिलायंस फ्लैग अटलांटिक फ्रांस की जांच की और पाया कि 2007-10 के बीच उसे छह करोड़ यूरो के कर का भुगतान करना था. हालांकि मामले को सुलटाने के लिए रिलायंस ने 76 लाख यूरो की पेशकश की लेकिन फ्रांस के अधिकारियों ने राशि स्वीकार करने से इनकार कर दिया.

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