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खण्डवा लोकसभा बीजेपी की झोली में..? पढिये क्यों..?

मध्यप्रदेश/खण्डवा (अनूप कुमार खुराना)-

लोकसभा चुनाव के लिये उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है।मध्यप्रदेश में मुकाबला प्रमुख रूप से दो पार्टियों के बीच होना है बीजेपी व कांग्रेस। दोनों पार्टियों में घोषित उम्मीदवारों की लिस्ट आना शुरू हो गई है। संभावित दावेदारों नें लोकसभा में आनें वाली सभी विधानसभा में फिल्डिंग पहले से ही शुरू कर दी थी । खण्डवा लोकसभा सीट से पाँच बार कांग्रेस के दिग्गजों को पटखनी दे चुके नंदकुमार सिंह चौहान को बीजेपी नें छठवीं बार भी कांग्रेस को शिकस्त देनें की मंशा लिये खण्डवा सीट से लोकसभा का प्रत्याशी बनाया है तो वहीं कांग्रेस स्ट्रोंग कैंडिडेट फार्मूले के लिहाज से खण्डवा सीट से अभी तक अपना अधिकृत प्रत्याशी घोषित नहीं कर पाई है परंतु अकाकू के सूत्रों के अनुसार कांग्रेस के पैनल में सिंगल नाम अरूण यादव का ही होनें से उनके ही खण्डवा सीट से चुनाव लड़नें की प्रबल संभावना है।जल्द इसकी ओपचारिक घोषणा भी हो सकती है ।

अगर नंदकुमार सिंह चौहान का मुकाबला हम यह मान लें कि अरूण यादव से ही होगा? तो आईये जानते हैं कि वर्तमान परिस्थिति में कौन किस पर भारी है? इस बात को जाननें से पहले आपको दोनों के कैरियर व बैकग्राऊंड के बारे में भी संक्षिप्त में समझा देते हैं। नंदकुमार सिंह चौहान का लम्बा राजनैतिक अनुभव है।उनकी राजनीतिक पारी अर्द्धशतक लगा चुकी है ।पाँच बार खण्डवा सीट पर बीजेपी का जीत का पताका फैहरा चुके हैं के अलावा बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष सहित कई महत्वपूर्ण पदों पर रहे हैं। नंदकुमार सिंह चौहान को राजनीति,विरासत में नहीं मिली।बुरहानपुर के शाहपुरा में किसान परिवार में जन्म लेकर लम्बे संघर्ष के बाद राजनैतिक मुकाम हासिल किया ।

वहीं दुसरी ओर अरूण यादव को राजनीति विरासत में मिली है। वह मध्यप्रदेश की राजनीति के सुपर स्टार रहे स्व.सुभाष यादव के बड़े पुत्र हैं। एक समय एसा था जब मध्यप्रदेश के विकास के लिये होनें वाले बड़े फैसले भी बोरांवा यानि अरूण यादव का घर से हुआ करते थे। अरूण यादव के छोटे भाई सचिन यादव वर्तमान में एमपी में कैबिनेट मंत्री है। भले ही अरूण यादव को राजनीति विरासत में मिली हो के बावजूद अरूण यादव को जमीनी नेता माना जाता है। अरूण यादव कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष सहित केन्द्रीय मंत्री भी रह चुके हैं।अरूण यादव नें बीजेपी का गढ मानें जानें वाले निमाड़ की महत्वपूर्ण सीट,खंडवा से दिग्गज राजनैतिक नंदकुमार सिंह चौहान को लोकसभा में पटखनी दी थी।

दोनों के राजनैतिक कैरियर को जानने के बाद आइए,अब समझते हैं कि अगर कांग्रेस से खंडवा लोकसभा सीट से अरुण यादव या अन्य कोई लड़ते हैं तो दोनों पार्टी की तैयारी कैसी है ?

बीजेपी ने जहां एक और खंडवा लोकसभा सीट से नंदकुमार सिंह चौहान को अपना अधिकृत प्रत्याशी घोषित कर दिया है तो वहीं कांग्रेस अभी अपना प्रत्याशी तक घोषित नहीं कर पाई है। आज की परिस्थिति में बीजेपी से नंदकुमार सिंह चौहान की तैयारी कांग्रेस के अरुण यादव से बहोत बेहतर दिखाई दे रही है। बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने के पश्चात नंदकुमार सिंह चौहान खंडवा की आठों विधानसभा में लगभग कई बार दौरा कर चुके हैं एवं कार्यकर्ताओं से मिल चुके हैं।नाराज कार्यकर्ताओं को भी मनाने का काम उन्होंने बहुत पहले से शुरू कर दिया था। बूथ लेवल पर भी बीजेपी की तैयारी कांग्रेस से बेहतर दिखाई दे रही है। कांग्रेस पार्टी के बाहर से आए पदाधिकारियों ने जरूर खंडवा लोकसभा की बूथ लैवल पर तैयारियां शुरू कर दी है परंतु स्थानीय नेताओं द्वारा लोकसभा के लिहाज से तैयारियां काफी कमजोर दिखाई दे रही है। टिकट फाइनल ना होने के चलते अभी कार्यकर्ता काफी कंफ्यूज दिखाई दे रहे हैं।अरुण यादव के भी क्षेत्र में नंदकुमार सिंह चौहान के मुकाबले दौरे बहुत कम रहे हैं जिसके चलते लोकसभा में आने वाली आठों विधानसभा में अरुण यादव ज्यादातर कार्यकर्ताओं से रूबरू नहीं हो पाए हैं ।पिछले 5 सालों के दौरान अरुण यादव ने बीजेपी के विरुद्ध कोई बड़ा आंदोलन क्षेत्र में नहीं किया जनता से भी दूरी बनाए रखी के मुकाबले नंदकुमार सिंह चौहान ने जनता के बीच जाने के अलावा कार्यकर्ताओं से मिलना लगातार जारी रखा। इतना ही नहीं बीजेपी की टीम अलग अलग कैंपेन चला कर अपने कार्यकर्ताओं को एकजुट कर,बूथ लेवल पर दायित्व सौंपना भी शुरू कर चुकी है दूसरी और कांग्रेस इस मामले में फिसड्डी नजर आ रही है । इन सभी बातों को आधार मानकर खंडवा लोकसभा सीट का चुनाव परिणाम घोषित करें तो बीजेपी (नंदकुमार सिंह चौहान)बड़े आराम से कांग्रेस ( अरुण यादव) को हराती नजर आ रही है ।

अब बात अगर दोनों के प्लस की करें तो नंदकुमार सिंह चौहान के पास सक्रिय कार्यकर्ता सहित अन्य संगठन की फौज के अलावा मोदी जैसा करिश्माई नेता है। खंडवा लोकसभा सीट के लिए भारत सरकार से 10000 करोड रुपए से ज्यादा के प्रोजेक्ट लाने के अलावा,प्रदेश में बीजेपी सरकार से स्थानीय स्तर पर विधायकों के साथ मिलकर अलग-अलग विधानसभा क्षेत्र के लिए प्रोजेक्ट लाने जैसे दावे हैं । तो वही अरुण यादव के पास निमाड़ की 5 विधानसभा सीट से कांग्रेस की टिकट पर जीत कर आए विधायक हैं। इसके अलावा खंडवा लोकसभा सीट के तहत आने वाली सभी विधानसभा में खास समर्थक हैं जो चुनाव के दौरान उनके लिए रात दिन काम कर सकते हैं।

अब बात अगर दोनों की माईनस की करें दोनों के रास्ते में कई कांटे भी हैं जो उन्हें परेशान कर सकते हैं । विधानसभा चुनाव के दौरान दोनों पार्टी से,टिकट ना मिलनें को लेकर कई दावेदार नाराज हैं जो अपने क्षेत्र में खासी पकड़ रखते हैं, जो खोल कर अपना विरोध भी दर्ज करा चुके हैं दोनों पार्टी को अपने अपने तरीके से नुकसान पहुंचा सकते हैं । इसके अलावा भीतरघाती भी नुकसान करने के लिए तैयार बैठे हैं यह दोनों पार्टी में दिखाई प्रतीत होते हैं। लोकसभा टिकट की मंशा लिए बैठे दोनों पार्टी के दावेदार भी निश्चित तौर पर अपने-अपने तरीके से दोनों को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करेंगे ।

कुल मिलाकर आज की स्थिति में अगर निष्पक्ष तौर पर आकलन किया जाए तो सभी प्रकार से विश्लेषण करने के पश्चात बीजेपी से नंदकुमार सिंह चौहान कांग्रेस से अघोषित अरुण यादव से फिलहाल बहुत बेहतर स्थिति में दिखाई दे रहे हैं ।

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