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एक ऐसा मुल्क जो बना डरावना व खुँखार आतंक का हेडक्वार्टर

 

पाकिस्तानी फौज में शुरू से ही एक बड़ा धड़ा कट्टर इस्लामिक संगठनों का समर्थक रहा है. जिसे आईएसआई की भरपूर मदद मिलती रही है. पाकिस्तान की अंदुरूनी राजनीति में भी इनकी काफी मजबूत पकड़ है.

दुनिया के सबसे बड़े आतंकवादी ओसामा बिन लादेन को अपने घर एबटाबाद में छुपा कर रखा. कश्मीर पर बुरी नजर ड़ालने के लिए पाक अधिकृत कश्मीर में आतंकवादियों को पैदा किया. लश्कर सरगना हाफिज सईद को पनाह दी. जैश के चीफ मौलाना मसूद अजहर के सिर पर हाथ रखा. अफगानिस्तान से भागे तो पाकिस्तान में तालिबान के लिए जमीन मुहैया कराई. भारत का मोस्ट वॉन्टेड डॉन दाऊद इब्राहीम जब मुंबई ब्लास्ट करके हवा हुआ तो उसे भी अपनी गोद में छुपा लिया. अब इतने सारे अमन और इंसानियत के दुश्मन अगर एक साथ किसी मुल्क में हों तो वो मुल्क आतंक का हेडक्वार्टर नहीं होगा तो फिर क्या होगा?

मुंबई में धमाके

हिंदुस्तान को आतंक का सबसे बड़ा और पहला ज़ख़्म 1993 में लहुलुहान मुंबई की शक्ल में मिला, पूरे मुंबई को धमाकों से दहला देने वाला चेहरा तभी आम हो गया था. पर दाऊद इब्राहीम तब तक चुपके से भाग चुका था. और फिर जाकर बस गया उसी आतंक के हेडक्वार्टर में यानी पाकिस्तान में.

संसद पर हमला

13 दिसंबर 2001 को पहली बार आतंक संसद की दहलीज तक पहुंच गया था. आतंकवादियों को संसद भवन तक पहुंचाया था जैश के उसी मुखिया मौलना मसूद अज़हर ने जो कांधार हाईजैकिंग में सौदेबाजी के बाद रिहा हो गया था. और रिहाई के बाद वो भी सीधे जा पहुंचा, उसी आतंक के उसी हेडक्वार्टर में यानी पाकिस्तान में.

मुंबई में 26/11

26/11 को मुंबई के जख्मी सीने को फिर से छलनी किया गया था. गोलिय़ां मुंबई में चल रही थीं, पर ट्रिगर दबाने का इशारा पाकिस्तान से हो रहा था. और इशारा कर रहा था लश्कर का चीफ हाफिज सईद. दस मीलियन डॉलर इनामी आतंकवादी. ये भी कहीं और नहीं वहीं पनाह लिए हुए है आतंक के हेडक्वर्टर में यानी पाकिस्तान में.

अमेरिका में 9/11

अमेरिका पर हमला कर इसने तो पूरी दुनिया को दहला दिया था. अलकायदा का मुखिया था ये. पूरे दस साल तक अमेरिका इसकी तलाश में दुनिया भऱ की खाक छानती रही. पर आखिर में ये भी मिला उसी आतंक के हेडक्वार्टर में. यानी पाकिस्तान में. और वहीं वो मारा भी गया.

पठानकोट हमला

पठानकोट पर हमला हुआ तो भी आतंक के उसी हेड़क्वार्टर से आतंकवादी आए थे. हमले से पहले बाकायदा पाकिस्तान फोन किया. अपनी खैरियत बताई फिर जरूरी हुक्म लिया. इधर, ये हुक्म ले रहे थे. उधऱ आतंक के हेडक्वार्टर यानी पाकिस्तान में बैठे मसूद अजहर के कमांडर इन्हें खूनखऱाबे का ऑर्डर दे रहे थे.

पुलवामा अटैक

सबसे ताज़ा ज़ख्म पुलवामा में मिला. सीआरपीएफ के काफिले पर फिदाईन हमला हुआ. हमलावार बेशक पुलवामा का ही था. बम से भरी कार भी वही चला रहा था. मगर उस कार बम का ट्रिगर थमाने वाला मसूद अज़हर इस बार भी वहीं बैठा था. आतंक के हेडक्वार्टर यानी पाकिस्तान में.

आतंकियों का सबसे बड़ा ठिकाना

दुनिया के नक्शे पर पाकिस्तान के वो तमाम नक्शे मौजूद हैं जहां आंतक की फैक्ट्री चलती है. जहां आतंकवादियों के ट्रेनिंग कैंप हैं. हाफिज सईद, मौलाना मसूद अजहर, सैयद सलाउद्दीन, दाऊद इब्राहीम जैसे आतंकवादियों को तो पाकिस्तान में कभी छुपने की भी नौबत नहीं आई.

तालिबान को पनाह

हिंदुस्तान के साथ-साथ अगर आतंक के इस हेडक्वार्टर में रहने वाले आतंकवादियों से सबसे ज्यादा कोई खून के आंसू रो रहा है तो अफगानिस्तान है. अफगान से भाग कर गए तालिबान को भी कहीं और नहीं बल्कि आंतक के इसी हेडक्वार्टर में आसरा मिला. यानी पाकिस्तान में.

जेहाद के नाम पर आतंक

दरअसल, पाकिस्तानी फौज में शुरू से ही एक बड़ा धड़ा कट्टर इस्लामिक संगठनों का समर्थक रहा है. जिसे आईएसआई की भी हमेशा भरपूर मदद मिलती रही है. पाकिस्तान की अंदुरूनी राजनीति में भी इनकी काफी मजबूत पकड़ है. यही कट्टर धार्मिक संगठन इस्लाम और जेहाद के नाम पर आतंक की फसल तैयार करते हैं. इन्होंने ही पाकिस्तान को आतंक का हेडक्वार्टर बना दिया है.

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