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दादाजी भक्त संत श्री कोमलभाउ का देवलोक गमन,कल 11 बजेे होगा अंतिम संस्कार…

खंडवा। खंडवा के श्री दादाजी धुनीवाले दरबार के सामने पटेल सेवा समिति नाम से जीवन पर्यन्त सेवारत श्री कोमलभाउ आखरे का गुरूवार  शाम निधन हो गया। वे पिछले कुछ दिनों से अस्वस्थ थे, उनका नागपुर के निजी अस्पाताल में इलाज चल रहा था। दो दिन पूर्व ही उन्हें वेंटीलेटर से उतारकर खंडवा लाया गया था, वे यहां हिन्दूजा हास्पिटल में उपचार हेतु भर्ती थे। शाम करीब छह बजे उन्होंने अंतिम सांस ली।

समाजसेवी सुनील जैन ने बताया कि भाऊ के दुखद निधन की खबर जैसे उनके अनुयायियों को मिली तो दुख लहर छा गई। कोमल भाऊ बाल्यकाल से दादाजी की सेवा में भक्ति से लगे रहे। श्री भाऊ की अंतिम यात्रा 8 फरवरी शुक्रवार को प्रात: 11 बजे दादाजी धाम से निकाली जाएगी जो शहर के विभिन्न मार्गो से दादाजी घाट पहुंचेगी जहां उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।

पटेल सेवा समिति के प्रमुख श्री कोमलभाउ की उम्र करीब 85 वर्ष थी। खंडवा में सौंसर छिंदवाड़ा, पांर्डुना, सहित महाराष्ट्र के हजारों दादाजी भक्त उनसे जुड़े थे। उन्होंने करीब सात दशक तक दादाजी की सेवा में जीवन गुजारा। बचपन वे दादाजी के ईदगिर्द घुमते रहते थे। एक बार स्वयं दादाजी ने उनकी मां से कहा था कि इसे मेरे पास छोड़ जाओं, दो टिक्कड़ खिलाउगा, मेरे आगे पीछे यह मोड़ा घुमता रहेगा। दादाजी की वाणी सच हुई। कोमलभाउ आखरे ने जीवनभर परिवार नहीं बसाया और दादाजी की सेवा करते रहे। एक बार भाउ साहब को जब वे समाधि सेवा से लौटकर टपरी में सो रहे थे तभी उन्हें सांप ने काट लिया। लोग घबराये, मुश्किल से रात गुजारी, सुबह श्री छोटे दादाजी के चरणों में लाया गया। धूनी की भस्म खिलायी गई और चरणामृत पिलाया। धीरे धीरे वे बोलने लगे। अस्पताल जाने की बात पर वे बोले मुझे दादाजी के पास छोड़ दो।

दादाजी भक्त मदन भाऊ ठाकरे ने बताया कि कोमल भाऊ के सानिध्य में ही 1952 में पटेल सेवा समिति की स्थापना की गई। जिसके माध्यम से दादाजी की सेवा, पूजन, अभिषेक, नैवेघ से लेकर सेवा के सारे काम पटेल सेवा समिति भाउ साहब के सानिध्य करती रही है। भाउ साहब ने ही भक्तों की सेवा के लिए भंडारे, दादाजी भक्तों के ठहरने के लिए पचास कमरों की धर्मशाला सहित दादाजी की सेवा के लिए फूल पेश करने के लिए बगीचा भी बनवाया। कोमलभाउ आखरे ने हजारों युवाओं को दादाजी से जोड़ा। ऐसे परिवार भी है, सैकड़ों की संख्या में है, जहां कभी दादा फिर पिताजी सेवा करने आते थे। आज उनके बेटे अपने बच्चों के साथ दादाजी दरबार में सेवा करने आते है। सदूर प्रांतों से पन्द्रह बीस दिन यहां आकर पटेल सेवा समिति में रूककर वे भाउ साहब के सानिध्य में सेवा करते थे। मुख्यमंत्री कमलनाथ भी कोमलभाउ आखरे से जुड़े हुए है।

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