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चिटफंड केस: कोलकाता में पुलिस कमिश्नर राजीव कुमार के घर CBI का छापा, CBI के 2 अफसरों को पुलिस ने किया गिरफ्तार

घोटालों की जांच में पश्चिम बंगाल पुलिस की विशेष जांच टीम का नेतृत्व करने वाले आईपीएस अधिकारी राजीव कुमार से लापता दस्तावेजों और फाइलों के सबंध में पूछताछ की जानी है.

कोलकातापश्चिम बंगाल के शारदा चिटफंड और रोज वैली घोटाले मामले में आज शाम सीबीआई कोलकाता पुलिस कमिश्नर राजीव कुमार के घर पर पहुंची. इस दौरान सीबीआई की टीम और कोलकाता पुलिस की टीम के बीच तनातनी भी हो गई, क्योंकि पुलिस ने सीबीआई को कमिश्नर के घर में घुसने से रोक दिया. इतना ही नहीं कहा ये भी जा रहा है कि पुलिस सीबीआई के दो अधिकारियों को थाने भी लेकर चली गई. दरअसल सीबीआई शारदा चिटफंड मामले में कोलकाता पुलिस कमिश्नर राजीव कुमार की पूछताछ के लिए तलाश कर रही है.

बता दें कि रोज वैली घोटाला 15,000 करोड़ रूपए का जबकि सारदा घोटाला 2500 करोड़ रूपए का है.  घोटालों की जांच में पश्चिम बंगाल पुलिस की विशेष जांच टीम का नेतृत्व करने वाले आईपीएस अधिकारी राजीव कुमार से लापता दस्तावेजों और फाइलों के सबंध में पूछताछ की जानी है, लेकिन वह जांच एजेंसी के समक्ष पेश होने से संबद्ध नोटिसों का जवाब नहीं दे रहे हैं.

अपनी गिरफ्तारी को लेकर डर गए हैं राजीव कुमार- अधिकारी

सूत्रों ने बताया कि 1989 बैच के पश्चिम बंगाल कैडर के आईपीएस अधिकारी निर्वाचन आयोग के अधिकारियों के साथ बैठक में भी शामिल नहीं हुए. आयोग के अधिकारी चुनाव की तैयारियों के संबंध में उनसे मिलने गए थे. संपर्क किए जाने पर उनके कर्मचारी ने दावा किया कि कुमार शुक्रवार को कार्यालय आए थे लेकिन चले गए थे. अधिकारियों ने बताया कि बंगाली फिल्म निर्माता श्रीकांत मोहिता को हिरासत में लिए जाने के बाद संभवत: वह अपनी गिरफ्तारी को लेकर डर गए हैं.

राजनीतिक बदले की ओछी भावना से काम कर रही है बीजेपी- ममता

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आज इस मामले को लेकर ट्वीट भी किया था, ममता ने ट्वीट में कहा, ”बीजेपी का शीर्ष नेतृत्व राजनीतिक बदले की ओछी भावना से काम कर रहा है, न सिर्फ राजनीतिक दल उनके निशाने पर हैं बल्कि पुलिस को नियंत्रण में लेने और संस्थानों को बर्बाद करने के लिए वे सत्ता का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं, हम इसकी निंदा करते हैं’.

ममता बनर्जी ने आगे कहा, ”कोलकाता पुलिस कमिश्नर दुनिया के सबसे बेहतरीन अधिकारियों में आते हैं, उनकी सत्यनिष्ठा, बहादुरी और ईमानदारी पर सवाल नहीं उठाया जा सकता, वो चौबीसों घंटे काम करते हैं, आप झूठ फैलाते हैं, झूठ हमेशा झूठ ही रहेगा.”

क्या है शारदा चिटफंड घोटाला?

कथित तौर पर तीन हजार करोड का ये घोटाला अप्रैल 2013 में सामने आया था. आरोप है कि शारदा ग्रुप की कंपनियों ने गलत तरीके से निवेशकों के पैसे जुटाए और उन्हें वापस नहीं किया. घोटाले के खुलासे के बाद जब एजेंटों से निवेशकों ने पैसे मांगने शुरू किये तो कई एजेंटों ने जान तक दे दी थी. इस घोटाले को लेकर पश्चिम बंगाल सरकार पर सवाल उठे थे.

 

 शारदा समूह द्वारा 10 लाख से अधिक निवेशकों को ठगने का अनुमान है. इस घोटाले से 3,000 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान होने की संभावना है. अप्रैल में बालासोर और ओडिशा में सैकड़ों निवेशकों ने समूह पर आरोप लगाया था कि उच्च लाभ का वादा कर उनसे पैसा लिया गया था, जिसे पूरा नहीं किया गया. इसके बाद ओडिशा में इस मामले की जांच शुरू हुई थी.

 

तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कुणाल घोष भी हुए थे गिरफ्तार

 

शारदा समूह की पूर्व कर्मचारी ने शारदा के प्रमोटर सुदीप्त के खिलाफ वेतन भुगतान नहीं करने का मामला दायर किया था. इसी मामले में सुदीप्त बाद में गिरफ्तार हुए. सुदीप्त और उसके कई सहयोगी अब जेल में बंद हैं. इसी घोटाले में संलिप्तता के कारण तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कुणाल घोष भी गिरफ्तार किए जा चुके हैं.  सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई से इस मामले की जांच करने को कहा था.

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